Sunday, 9 January 2022

एक बार गांव में भी आया करो

दौलत की अंधी दौड़ में, गांव सुनसान पड़े हैं ।

नाच नाच कर जो, भगवान बैठाये मंदिर में ।

वो मंदिर सुनसान पड़े हैं ।।

पुजारी पगार पर बुलाया जा रहा है,

लोग गांव का घर बेचने की जिद पर अड़े हैं ।

मत भागो दूर अपने अस्तित्व से,

गांव के महलो जैसे घर के मालिक, शहरो में सिकुड़े पड़े हैं ।।

और कहते हैं की हम तरकी की राह पर खड़े हैं ,

माना कि गांव में बरस भर रह नहीं सकते,

पर छुटिया तो गांव में मनाया करो ।।

गर्मी अच्छी न लगे, तो सर्दी में आया करो ।

सर्दी अच्छी ना लगे, तो होली पर आया करो ।

होली अच्छी ना लगे, तो दिवाली में आया करो ।

दिवाली अच्छी ना लगे, तो सम्मेलन में आया करो ।

भले तीन छुटियां मनाओ शहर में, पर एक बार तो गांव में भी आया करो ।।