Friday, 23 July 2021

न समझ निराश खुदको

 न कर निराश खुदको, न समझ खराब खुदको,

जरा देख निगाहों में भरके उनको,

जो जी रहा है तू जिंदगी,

वो किसी और का सपना हैं।

उनके दर्द को देख, तेरा दर्द कम हो जाएगा,

तेरा दर्द तुझे नजर भी न आएगा,

जा पूछ उस मां से, उस पर क्या बीती होगी,

मरने की उम्र में, जिसने मौत देखी होगी।

जा पूछ उससे, जो मांग में सिन्दूर सजाती होगी,

सजने की उम्र में, दर्द से मांग मिटाती होगी।

जा पूछ उस बाप से, जो अब भी आने का इंतजार करता है,

जानता है सच, पर स्वीकार नहीं करता है।

भाई ने साथी खोया, बहन ने राखी,

न बन तू बेवजह निराशावादी।

उसके पास हाथ नहीं, पर काम बहुत करता हैं,

जिंदगी की जंग, लड़ने से न डरता है।

जरा आंख घुमा और देख, सब कुछ है तेरे पास,

क्यों है फिर भी तू निराश,

न समझ खराब खुदको, न कर निराश खुदको,

जो जी रहा है तू जिंदगी, वो किसी और का सपना हैं।


~ अशोक राजपुरोहित

Monday, 19 July 2021

सही गलत में, मैं उलझ गया

सही गलत में, मैं उलझ गया,
समझ ना पाया, क्या सही, क्या गलत।
अगर सही सही है, तो सही के साथ क्यों गलत।
गलत अमीर, सही गरीब, क्या समझूं सही सही या सही गलत।
अगर सही सही तो रास्ता इतना कठोर क्यों,
हर मोड़ पर, मिलता क्यों, इतना अफसोस क्यों,
क्या बोलूं सही सही क्या सही गलत।
या फिर मैं समझूं, सही बड़ा अनमोल है,
इसका न कोई तोल है,
खरीदार नहीं, सही को खरीदने के लिए,
सफर लंबा है, चलने के लिए।

 ~ अशोक राजपुरोहित

 Waqt ke sath insaan ko aage badhna chahiye,

warna yaadein takleef deti hai zindagi bhar😎

     ~ Ashok Singh Rajpurohit